मंगलवार, 31 जुलाई 2018

बढ़ती उम्र पर सलाह

Sex Knowledge

*1. सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए*?
    उत्तर -     हल्का गर्म

*2.  पानी पीने का क्या तरीका होता है*?
    उत्तर -    सिप सिप करके व नीचे बैठ कर

*3. खाना कितनी बार चबाना चाहिए*?
     उत्तर. -    32 बार

*4.  पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए*?
     उत्तर. -     सुबह

*5.  सुबह का नाश्ता कब तक खा लेना चाहिए*?
     उत्तर. -    सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक

*6.  सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?
          उत्तर. -     जूस

*7.  दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?
    उत्तर. -     लस्सी / छाछ

*8.  रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिए*?
    उत्तर. -     दूध

*9.  खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिए*?
    उत्तर. -     रात को

*10. आईसक्रीम कब खानी चाहिए*?
       उत्तर. -      कभी नही

*11. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद*
      *खानी चाहिए*?
      उत्तर. -    1 घण्टे बाद

*12. क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए*?
       उत्तर. -      नहीं

*13.  बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा*
      *लेना चाहिए*?
      उत्तर. -     40 मिनट

*14.  रात को कितना खाना खाना चाहिए*?
       उत्तर. -    न के बराबर

*15.  रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए*?
      उत्तर. -     सूरज छिपने से पहले

*16. पानी खाना खाने से कितने समय पहले*
     *पी सकते हैं*?
      उत्तर. -     48 मिनट

*17.  क्या रात को लस्सी पी सकते हैं*?
     उत्तर. -     नहीं 

*18.  सुबह नाश्ते के बाद क्या करना चाहिए*?
       उत्तर. -     काम

*19. दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना*
       *चाहिए*?
       उत्तर. -     आराम

*20. रात को खाना खाने के बाद क्या करना*
     *चाहिए*?
      उत्तर. -    500 कदम चलना चाहिए

*21. खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना चाहिए*?
      उत्तर. -     वज्रासन

*22. खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर*
      *करना चाहिए.*?
           उत्तर. -     5 -10 मिनट

*23.  सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिए*?
      उत्तर. -    ठंडा पानी।

*24.  रात को किस समय तक सो जाना चाहिए*?
      उत्तर. -     9 - 10 बजे तक

*25. तीन जहर के नाम बताओ*?
      उत्तर.-    चीनी , मैदा , सफेद नमक

*26. दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना*
      *चाहिए*?
      उत्तर. -     अजवायन

*27.  क्या रात को सलाद खानी चाहिए*?
      उत्तर. -     नहीं

*28. खाना हमेशा कैसे खाना चाहिए*?
      उत्तर. -     नीचे बैठकर व खूब चबाकर

*29. चाय कब पीनी चाहिए*?
      उत्तर. -     कभी नहीं

*30. दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिए*?
      उत्तर. -    हल्दी

*31.  दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए*?
      उत्तर. -    कैंसर ना हो इसलिए

*32. कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक है*?
      उत्तर. -   आयुर्वेद

*33. सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए*?
      उत्तर. -   अक्टूबर से मार्च (सर्दियों में)

*34. ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए*?
      उत्तर. -    जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु)

*35. मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिए*?
      उत्तर. -  मार्च से जून (गर्मियों में)

*36. सुबह का पानी कितना पीना चाहिए*?
      उत्तर. -  कम से कम 2 - 3 गिलास।

*37. सुबह कब उठना चाहिए*?
       उत्तर. -  सूरज निकलने से डेढ़ घण्टा पहले।

*38.इस मैसेज को कितने ग्रुप में भेजना चाहिए ।*
        उत्तर . सभी ग्रुपो में!

*39.क्या पुण्य के कार्य में देर* *करनी चाहिए।*
उत्तर. नहीं।
 बढ़ती उम्र पर सलाह

(अद्भुत संदेश - अंत तक जरूर पढ़ें नहीं तो आप अपने जीवन का एक दिन गवाँ देंगे।)
कैसे बने रहें - चिरयुवा
1. फालतू की संख्याओं को दूर फेंक आइए। जैसे- उम्र, वजन, और लंबाई। इसकी चिंता डॉक्टर को करने दीजिए। इस बात के लिए ही तो आप उन्हें पैसा देते हैं।

2. केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और  चिड़चिड़े लोग तो आपको नीचे गिरा देंगे।

3. हमेशा कुछ सीखते रहिए। इनके बारे में कुछ और जानने की कोशिश करिए - कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी। चाहे रेडियो ही। दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और उस शैतान के परिवार का नाम है - अल्झाइमर मनोरोग।

4. सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए।

5. खूब हँसा कीजिए - देर तक और ऊँची आवाज़ में।

6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है - वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक 'जिन्दा' रहिए।

7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो - चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही आपका आश्रय है।

8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए।

9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन वहाँ कतई नहीं जहाँ खुद के बारे में खराब लगने लगे।

10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए  कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारी सांस लेकर चले जाते हैं

कोई फर्क नहीं पड़ता जो आप इस संदेश को कम से कम आठ लोगों तक न भेजें, लेकिन भेजिए जरूर। हमें प्रतिदिन का जीवन भरपूर तरीके से जीने की आवश्यकता है।

जीवन की यात्रा का अर्थ यह नहीं कि अच्छे से बचाकर रखा हुआ आपका शरीर सुरक्षित तरीके से श्मशान या कब्रगाह तक पहुँच जाय। बल्कि आड़े-तिरछे फिसलते हुए, पूरी तरह से इस्तेमाल होकर, सधकर, चूर-चूर होकर यह चिल्लाते हुए पहुँचो - वाह यार, क्या यात्रा थी!

इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* - अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* - अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* - मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* - जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना*  - कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* - लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* - कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* - रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* - कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* - जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है। 

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सेक्स के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद

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*सेक्स के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद*
सेक्स उत्पत्ति के लिए करें या महज़ आनंद के लिए, इसके तरीक़े जानना हमेशा फायदेमंद रहता है. हर क्रिया करने के कुछ तरीके होते हैं. सेक्स के ये तरीके हम इस क्रिया के द्वारा सीखते हैं या फिर उस भंडार के बारे में        जानने    कि कोशिश करते हैं जो सदियों से सभ्यताओं   के द्वारा इक्कट्ठा किया गया है. सेक्स पर भारत में एक पुराना ग्रन्थ है, कामसूत्र. सेक्स की मुद्राओं को दर्शाते हमारे यहाँ कई मंदिर हैं. इन सबमें अनेक मुद्राओं के द्वारा  ज्यादा से ज्यादा आनंद तथा उचित तरीके पर जोर दिया गया है. इसी तरह आयुर्वेद भी सेक्स के बारे में   अपनी कुछ राय रखता है, जिस पर विचार डालना हमारे लिए लाभप्रद हो सकता है. आइये जानते हैं, आयुर्वेद की निगाह  से सेक्स यानी सम्भोग के बारे में.

 *समय बेहद अहम् कारक है*
हर चीज़ में समय एक जरूरी हिस्सा होता है. आप कौन सी क्रिया, किस वक़्त निभा रहें हैं, ये मायने रखता है. आयुर्वेद कहता है कि पूर्णिमा के दिन सेक्स ज्यादा आनंददायक होता है. इसके अनुसार रात के दस से ग्यारह के बीच मनुष्य अपनी उर्जा के चरम पर रहता है,  इसलिए ये वक़्त सेक्स के लिए बेहद गुणात्मक होता है. भोजन के कम से कम दो घंटे के बाद ही सेक्स करना चाहिए.

 *पाचन*
आप भूखे पेट या खाने के तुरंत बाद अगर सेक्स में संलिप्त होते हैं तो या तो आप निढाल पड़ जायेंगे या फिर ये आपके लिए कष्टकर हो जाएगा. खाने के कम से कम दो घंटे बाद, जब भोजन पाच जाता है और आपके शरीर में उर्जा का प्रवाह रहता है, सेक्स बेहद मज़ेदार साबित हो सकता है. आयुर्वेद के अनुसार खाने के तुरंत बाद सेक्स में शामिल होने से आपके दिमाग और शरीर के बीच भ्रम स्थापित हो जाता है और ऐसे में सेक्स आपके लिए बोझिल हो जाएगा.

 *कुछ बेहद जरूरी बातें*
यदि आप बीमार, थके हुए, गुस्से में, तनाव ग्रस्त, भूखे या प्यासे हैं तो आप उचित समय का इंतज़ार कीजिये. इनमें से किसी भी स्थिति में सेक्स का आपके शारीर तथा दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. सेक्स से आनंद लेने के लिए आपको उस वक़्त, उस जगह पर होना बहुत जरूरी है. दोनों जन को एक दूसरे को अपनी उपस्थिति का भान कराना होता है, तभी सेक्स, दोनों के लिए आनंद का कारण बन सकता है.

 *तैयारी*
सेक्स को किसी भी आम क्रिया समझ कर करेंगे तो ये बोझिल और उबाऊ ही साबित होगी. इसके लिए उस जगह को सुन्दर बनायें. सही समय का इंतज़ार करें. सेक्स के पहले कुछ हल्का तथा मीठा भोजन उपयुक्त रहता है. उस जगह को दृश्य तथा गंध की दृष्टि से लुभावना बनाने से सेक्स ज्यादा आनंददायक लगता है. सेक्स के पहले स्नान करने या अच्छे मूड में रहने से आप उसमें पूरी तरह शामिल हो सकेंगे. आप चाहें तो संगीत का सहारा भी ले सकते हैं.

 *संतुलन*
ज़िन्दगी की सारी अच्छी चीज़ों की तरह सेक्स के भी दस्तूर हैं कि आपने इसे आवश्यकता से ज्यादा या कम किया तो ये बेकार साबित होगी. आयुर्वेद, मानव शरीर में शक्ति को ओजस के रूप में देखता है. इसके अनुसार ओर्गाज्म के समय ओजस का क्षय होता है. इसलिए यदि हम लगतार सेक्स में ही संलिप्त रहेंगे तो हम ज़िन्दगी के अन्य क्रियाओं के लिए ओजस खो देंगे. इसी तरह एक निहित समय के अन्दर सेक्स नहीं करने से भी हमारी शक्ति का भटकाव होता है. कभी सेक्स नाहीं करने का अर्थ ओजस का बढ़ना नहीं होता है. आप यदि अपने शरीर तथा दिमाग में संतुलन बना कर रखेंगे तो आपका अपना सही समय मालूम चलता रहेगा.
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बुधवार, 11 जुलाई 2018

लकवा का 100% आयुर्वेदिक इलाज


                    *लकवा का 100% आयुर्वेदिक इलाज* 


                                  *लकवा【Paralysis】*

लकवा (पैरालिसिस) यह रोग शरीर के स्नायुओं और स्नायु केंद्र, दिमाग का रोग है। जिस इंसान के शरीर का स्नायुमंडल, स्नायु केंद्र और मस्तिष्क अच्छी तथा स्वाभाविक दशा में रहते हैं, उसे लकवा कभी नहीं होता। आरंभ से ही यदि प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाया जाए, संयम, नियम से काम किया जाए, स्वास्थ्यवर्धक एवं उपयुक्त आहार-विहार का आश्रय लिया जाए तथा हर प्रकार के मानसिक तनावों एवं चिंताओं से बचा जाए तो लकवा होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। लकवा आने से बहुत पहले ही मस्तिष्क कमजोर पड़ जाता है। शरीर के स्नायु जगह-जगह कमजोर एवं शक्तिहीन हो जाते हैं। इससे आंख तथा कान आदि इंद्रियों की कार्यक्षमता मंद पड़ जाती है। थोड़ा सा काम या बातें करने पर ही थकान महसूस होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगे तो ये पैरालिसिस होने के लक्षण हो सकते है। जब ऐसा हो तो तुरंत सजग हो जाएँ और जरूरी उपचार लेना आरंभ कर दें। और सभी कार्य बंद करके शारीरिक एवं मानसिक आराम करें। प्राकृतिक आहार विहार अपनाएँ। कम परिश्रम करें |

यह बीमारी ज्यादातर 30 से ज्यादा की उम्र वालों को होता है | यह एक ऐसा रोग हैं जो की व्यक्ति को असहाय कर देता हैं, जिसको लकवा हुआ होता हैं उसकी और देखा भी नहीं जा सकता, रोगी की ऐसी हालत हो जाती हैं. ऐसे में लकवा का रोगी लाचार असहाय-सा दूसरे व्यक्तियों के मुंह की तरह देखता रहता हैं |

मांसपेशियों में एक विशेष प्रकार का ऊतक है जो हमारे शरीर को स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है. यह तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में है, जो शरीर के सभी हिस्सों से संदेश भेजता है. कभी-कभी तंत्रिका कोशिकाओं, या न्यूरॉन्स, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं, रोगग्रस्त या घायल हो जाते हैं जब ऐसा होता है, तो एक व्यक्ति स्वेच्छा से यानी अपनी मर्जी से मांसपेशियों को स्थानांतरित करने की क्षमता खो देता है इसी को हम लकवा कहते हैं. यानी रोगी अपने शरीर के किसी अंग पर नियंत्रण करने की क्षमता खो देता हैं इसी प्रक्रिया को हम लकवा कहते हैं.
लकवे का असर व्यक्ति के शरीर के किसी भी अंग पर हो सकता हैं, ज्यादातर ऐसे अंगों पर यह दौरा पढता जिस अंग की मांसपेशियां कमजोर हो.
                                        *लकवा के प्रकार*
पैरालिसिस के कई प्रकार होते हैं, यह शरीर के किसी भी अंग पर लग सकता है |
*1.आधे शरीर का लकवा –* इसमें शरीर का आधा भाग लकवाग्रस्त हो जाता हैं इसे इंग्लिश में one sided paralysis कहा जाता हैं. 

*2.एकांग लकवा –* जब किसी व्यक्ति के शरीर के किसी एक अंग में लकवा लगता है तो उसे एकांग का लकवा कहते है |

*3.पूर्णांग का लकवा –* किसी व्यक्ति के शरीर के दोनों हाथ और दोनों पैर लकवा ग्रस्त हो जाते हैं तो उसे पूर्णांग लकवा कहा जाता है |

*4.निम्न अंग का लकवा –* शरीर के निचले हिस्से के किसी अंग पर लकवा लगने को ही निम्न अंग का लकवा कहते है |

*5.चहरे का लकवा –* यह लकवा चेहरे पर लगता हैं, यानी चेहरे के किसी एक हिस्से पर इसका प्रभाव होता हैं. जिस हिस्से पर इसका प्रभाव हो वह लटक जाता हैं |

लकवा के और भी कई प्रकार हैं लेकिन जो हमने आपको यहां पर बताये हैं यह सबसे सामान्य हैं यानी ज्यादातर लोगों को इन्ही अंगों में लकवा लगता हैं.

                                     *लकवा होने के कारण*
लकवा लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो की इस तरह है :-
धमनियों में किसी खराबी के कारण भी पैरालिसिस हो सकता है |

मस्तिष्क की नसों के फटने से भी यह रोग होने की संभावना रहती है |

सिर (मस्तिष्क) में खून बहने से भी लकवे की शिकायत हो जाती है |

जिन लोगों को ब्रेन ट्यूमर और कैंसर रोग है उनको भी यह लकवा लगने का डर रहता है |

चोट के कारण भी ज्यादातर लकवा लगते हैं. ज्यादातर रोगी ऐसे ही देखने को मिलते है जिन्हें चोट के कारण पैरालिसिस हो सकता है |

व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने से भी यह रोग हो सकता है |

अचानक किसी भी चीज के बारे में अच्छी या बुरी खबर सुनने से भी ज्यादा ख़ुशी या ज्यादा गम के सदमे के कारण भी पैरालिसिस हो सकता है|
हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होने से भी ज्यादातर व्यक्तियों को लकवा लगता है |
स्नायु संस्थान की कमजोरी होने पर ही यह बीमारी जन्म लेती है |
बताये गए यह सभी कारण लकवा को जन्म देते हैं, ऐसे में जरुरी हैं की आम स्वस्थ्य व्यक्ति भी इन सभी कारणों पर ध्यान दें |

                                      *लकवा के लक्षण*
इस बीमारी में रोगी का आधा मुंह टेढ़ा हो जाता है। गर्दन टेढ़ी हो जाती है, मुंह से आवाज नहीं निकल पाती है। आंख, नाक, भौंह व गाल टेढ़े पड़ जाते हैं, फड़कते हैं और इनमें वेदना होती है। मुंह से लार गिरा करती है।
जब किसी व्यक्ति के शरीर में किसी अंग पर लकवा लगने वाला होता है तो वह पहले ही लक्षण दिखाने लगता हैं. यानी की ऐसा नहीं हैं की सीधे ही किसी एक दिन लकवा लग जाता हैं, बल्कि इस बीच शरीर के जिस अंग पर लकवा लगना है वह पहले ही संकेत देने लगता हैं तो आइये जाने उस संकेतों के बारे में |

 *स्नायु की शिथिलता –* जब भी शरीर में लकवा लगने वाला होता है तो शरीर के स्नायु धीमे हो जाते हैं, वह ठीक तरह से काम करना बंद कर देते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी को जीभ में लकवा लगने वाला है तो उसे इस तरह से लक्षण दिखाई देने लगेंगे – कई बार जीभ उसके इशारे से इधर उधर नहीं मुड़ेगी, कई बार एहसास होगा की जीभ हिल नहीं रही है, जीभ का शुन्य पढ़ जाना आदि इस तरह से शरीर के सभी अंग लक्षण देने लगते हैं |

जिस भी व्यक्ति को लकवा लगने वाला होता है उसमे उत्साह की कमी देखी जा सकती है जैसे-
सीढ़ियां उतरने व चढ़ने में दिक्कत आना
हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ना
पूरी नींद नहीं आना
भूख कम लगना
लकवा लगने वाले अंग की स्पर्श शक्ति का कमजोर होना
लिखने व पढ़ने, बोलने में समस्या आने लगती हे

साइटिका का 100% आयुर्वेदिक इलाज

                       *साइटिका का 100% आयुर्वेदिक इलाज* 


    *साइटिका【Sciatica】* 

साइटिक तंत्रिका आपकी रीढ़ की हड्डी से शुरू होती है, आपके कूल्हों और नितंबों के माध्यम से चलती हुई दोनों पैर में नीचे की तरफ शाखाएं जाती हैं। यह तंत्रिका आपके शरीर की सबसे लंबी तंत्रिका है और सबसे महत्वपूर्ण तंत्रिकाओं में से एक है। इसका आपके पैरों को नियंत्रित करने और महसूस करने की आपकी क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब इस तंत्रिका में परेशानी उत्पन्न होती है, तो आप साइटिका यानि कटिस्नायुशूल का अनुभव करते हैं।

साइटिका एक सनसनी है जो कि आपकी पीठ, नितंबों और पैरों में मध्यम से गंभीर दर्द के रूप में प्रकट हो सकती है। आप इन क्षेत्रों में कमजोरी या सुन्नता भी महसूस कर सकते हैं। साइटिका आपके साइटिक तंत्रिका या ऐसे क्षेत्र में चोट की वजह से, जो तंत्रिका को प्रभावित करती है, से उत्पन्न होने वाला लक्षण है। जैसे कि आपकी कशेरुकाएं, जो आपकी गर्दन और पीठ की हड्डियां हैं।
साइटिका 30 से 50 साल की उम्र के लोगों के बीच होने की अधिक संभावना होती है।
                      *साइटिका के लक्षण*

साइटिका लक्षण का एक बहुत अलग प्रकार है। यदि आपको अपने पीठ के निचले हिस्से से अपने नितंब क्षेत्र से होते हुए आपके निचले अंगों में बहने वाले दर्द का सामना करना पड़ रहा है, तो यह आमतौर पर साइटिका होता है।
साइटिका आपके साइटिक तंत्रिका को नुकसान या चोट का परिणाम होता है, इसलिए तंत्रिका क्षति के अन्य लक्षण आमतौर पर दर्द के साथ उत्पन्न होते हैं। 


*अन्य लक्षणों में निम्न लक्षण शामिल हो सकते हैं:*

आपको दर्द हो सकता है जो हिलने-डुलने से और बदतर हो जाता है।

आपके टांगो या पैरों में आपको सुन्नता या कमजोरी हो सकती है, जो कि आमतौर पर आपके साइटिक तंत्रिका पथ में महसूस होती है। गंभीर मामलों में, आपके पैरों का महसूस होना या हिलना-डुलना भी बंद हो सकता है।

आप पिंस और सुई की सेंसेशन महसूस कर सकते हैं, जिसमें आपके पैर की उंगलियों या पैरों में एक दर्दनाक झुनझुनी होना भी शामिल है।

आप नित्य कर्म पर नियंत्रणहीनता का अनुभव कर सकते हैं, यह आपके मूत्राशय या आंत को नियंत्रित करने में अक्षमता है। यह कौडा एक्विना सिंड्रोम (अचलताकारक कशेरूकाशोथ) का एक दुर्लभ लक्षण है। और इसे पर तत्काल आपातकालीन ध्यान देने की आवश्यकता है।
                      *साइटिका के कारण*

साइटिका आपकी रीढ़ से जुड़ी कई स्थितियों के कारण हो सकती है और आपकी पीठ की नसों को प्रभावित कर सकती है। यह चोटों की वजह से भी हो सकती है, उदाहरण के लिए गिरने से या रीढ़ की हड्डी अथवा साइटिक तंत्रिका ट्यूमर के कारण।

*सामान्य स्थितियां जो साइटिका का कारण बन सकती है नीचे वर्णित हैं:-*

*हर्नियेटेड डिस्क्स:-* इसे स्लिप डिस्क भी कहते है। आपकी कशेरुकाएं या रीढ़ की हड्डी कार्टिलेज (उपास्थि) के टुकड़ों से अलग हो जाती हैं। कार्टिलेज एक गाढ़े, साफ पदार्थ से भरा हुआ है ताकि जोड़ों को चारों ओर घूमते समय लचीलापन और गद्दीनुमा महसूस हो सकें। हर्नियेटेड डिस्क्स तब होती है जब कार्टिलेज की पहली परत हट जाती है। अंदर के पदार्थ साइटिक तंत्रिका को संकुचित कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप निचले अंग में दर्द और सुन्नता हो जाती है। अमेरिकन अकादमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन के मुताबिक, यह अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक 50 लोगों में से एक को अपने जीवनकाल में हर्नियेटेड डिस्क का अनुभव होगा।

*स्पाइनल स्टेनोसिस:-* स्पाइनल स्टेनोसिस को कमर संबंधी रीढ़ की हड्डी का स्टेनोसिस भी कहा जाता है। आपकी रीढ़ की हड्डी की निचली नलिका का असामान्य संकुचन इसकी विशेषता है। यह संकुचन आपकी रीढ़ की हड्डी और आपके साइटिक तंत्रिका की जड़ों पर दबाव डालता है।

*स्पोन्डयलोलिस्थेसिस:-* स्पोन्डयलोलिस्थेसिस, डिजेनेरेटिव डिस्क विकार सम्बंधित स्थितियों में से एक है। जब एक रीढ़ की हड्डी या कशेरुक, एक दूसरे से आगे बढ़ती है, तो विस्तारित रीढ़ की हड्डी आपकी साइटिक तंत्रिका को प्रेरित सकती है।

*पिरिफोर्मिस सिंड्रोम:-* पिरिफोर्मिस सिंड्रोम एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर विकार है, जिसमें साइटिका के कारण आपकी पिरिफोर्मिस मांसपेशियां अनायास ही संकुचित या कस जाती है। आपकी पिरफॉर्मिस मांसपेशी वह मांसपेशी है जो आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से को जांघों से जोड़ती है। जब यह कड़ी हो जाती है, तो यह आपकी साइटिक तंत्रिका पर दबाव डालता है, जिससे साइटिका हो जाती है। यदि आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं, गिर जाते हैं या कार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो पिरिफोर्मिस सिंड्रोम गंभीर हो सकता है।
                     *साइटिका से बचाव*

खड़े होने, चलने और बैठने पर सही आसन बनाए रखें।
ऐसा व्यायाम करें जो एरोबिक फिटनेस और पेट व रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों में ताकत और लचीलापन बनाए रखता है।
कोई भी चीज सही तरीके से उठाने की तकनीक का अभ्यास करें। इसके लिए घुटनों को मोड़कर पीठ को सीधा रखें। ऐसा करने से, तनाव कूल्हे और पैरों पर आ जाता है, पीठ पर नहीं। उस वस्तु को शरीर के पास पकड़ कर रखें। शरीर से जितनी दूर वस्तु रहती है उतना अधिक तनाव पीठ पर पड़ता है।
जब बैठने के लिए कुर्सियों का उपयोग करें तो यह सुनिश्चित करें कि आपकी पीठ अच्छी तरह से टिकी  हुई है। ऐसी कुर्सियों का उपयोग करें जो अच्छा बैक सपोर्ट प्रदान करती हैं और बैठने की एक अच्छी स्थिति प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गयी हैं। एक लकड़ी का रोल या कॉन्टर्ड कुशन आपकी पीठ के निचले भाग को सपोर्ट प्रदान करने में मदद कर सकता है।धूम्रपान न करें।

                   *घरेलू उपाय (उपचार)*

बर्फ़ पैक तुरंत राहत पाने का एक सिद्ध तरीका है, लेकिन सियाटिक तंत्रिका शरीर के बहुत भीतर स्थित है, इसलिए पैक का असर काफ़ी भीतर तक नहीं जा सकता जहां सूजन है। बर्फ़ पैक के ठीक बाद गरम पैक लगाए या उससे भी बेहतर है के एक गर्म स्नान ले। तापमान को बदल कर, आप संचलन और लिम्फ प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। इससे भीतर के सूजन में कमी आएगी और इलाज में सहायता होगी। बेहतर परिणाम के लिए, अपने स्नान में कुछ सेँधा नमक या ज्वलनशीलता विरोधी जड़ी बूटियों या आवश्यक तेलों का इस्तेमाल करें।
क़ब्ज से सावधान रहें।

रविवार, 8 जुलाई 2018

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सफेद दाग क्या है

सफेद दाग
            * सफेद दाग【Leucoderma】* 
 
*सफेद दाग क्या है*

♦इस रोग में त्वचा का प्राकृतिक रंग बदल जाता है और वहां सफेदी आ जाती है। सफेदी के कारण इसे शिवत्र भी कहते हैं। इस रोग को हिन्दी में ‘श्वेत कुष्ठ’ अथवा ‘सफेद कोढ़’ के नामों से भी जाना जाता है, परंतु कुछ चिकित्सक इसे ‘कोढ़” न मानकर एक अलग ही रोग मानते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से पर त्वचा का रंग में बदलाव होकर धीरे-धीरे यह रोग फैलता जाता है और एक समय ऐसा आता है, जब लगभग सारा शरीर ही सफेद हो जाता है। शरीर के विभिन्न भागों (चेहरा, होंठ, टांग, हाथ) पर पहले छोटे-छोटे सफेद दाग या सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं, परंतु बाद में वे धीरे-धीरे फैलते जाते हैं | यह रोग संक्रामक नहीं होता और न ही इसके होने पर दर्द होता है। मेडिकल टर्म में इस समस्या को Virgilio के नाम से जाना जाता है | दरअसल त्वचा के बाहरी स्तर में मेलेनिन नामक रंजक द्रव्य रहता है, जो त्वचा को प्राकृतिक रंग देता है। विभिन्न कारणों से इसके ठीक से काम न करने से सफेद दाग उत्पन्न होते है |

♦ये सफेद दाग कभी-कभी तो अपने आकार में सिमटकर ही रह जाते हैं और कभी-कभी शरीर पर अत्यधिक फैल जाते हैं।
यदि त्वचा पर हल्के सफेद दाग और दाग छोटे, कम हों तो चिकित्सा के लायक समझा जाता है |

 
♦सफेद दाग कोई ऐसा रोग नहीं जो एक से दूसरे को लग जाए। पीड़ित रोगी की संतान भी सफेद दाग से ग्रस्त हो, ऐसा जरुरी नहीं होता। इस बीमारी को छिपाने की जरूरत नहीं है। सफेद दाग का सफल इलाज लगभग सभी चिकित्सा प्रणालियों में है मगर ये इस पर निर्भर करता है की बीमारी की तीव्रता क्या है कौन सी स्टेज है और रोग को कितना समय हुआ है | सबसे ज्यादा समय की भूमिका ज्यादा खास होती है जितना जल्दी आप इसका इलाज करवाएंगे इसके ठीक होने की उतनी ही ज्यादा संभावना होगी |
♦सफेद दाग की विकृति कुष्ठ की तरह हानिकारक नहीं होती है। चिकित्सा करने पर सफेद दागों को आसानी से ठीक किया जा सकता है। कुछ रोगियों के सफेद दाग पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और कुछ रोगियों के चेहरे और शरीर के विभिन्न अंगों में हल्के दाग रह जाते है

                  *सफेद दाग होने के कारण*

श्वेत कुष्ठ की उत्पति प्रकृति विरुद्ध खाना खाने से , खाने में अनियमितता, बासी, दूषित सड़े-गले मांस के खाने से होती है।


सफेद दाग होने के अन्य कारणों में जब कोई व्यक्ति मछली और दूध, नीबू का रस व घी, घी और दही आदि 


प्रकृति विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का निरंतर सेवन करता है तो रक्त दूषित होने से श्वेत कुष्ठ पैदा होता है।
आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सफेद दाग होने का प्रमुख कारण त्वचा में स्थित मेलोनिक नामक रंगीन पदार्थ का निर्माण करने वाली पेशियां किसी कारण से कमजोर हो जाती हैं तो त्वचा पर सफेद दाग बनने लगते हैं।
श्वेत कुष्ठ कोई प्राणघातक रोग नहीं, लेकिन इन सफेद दागों से चेहरे की सुंदरता नष्ट हो जाने के कारण सभी इस रोग से भयभीत रहते हैं।
वैसे ज्यादातर विशेषज्ञों का मत यह है की सफेद दाग होने के प्रमुख कारणों में त्वचा में मेलानोसाइट्स सेल्स द्वारा उत्पादित मेलेनिन की कमी ही होता है
फंगल संक्रमण से भी सफेद दाग होने का कारण होता है


खाने में तांबा तत्व की कमी होना |
त्वचा के जल जाने से अंदुरुनी परत का खराब हो जाना |
पैतृक या वंशानुगत होना, रजस्वला, विरुद्ध (बेमेल) भोजन करना, भोजन पचे बिना दूसरा भोजन करना, गरिष्ठ पदार्थों का सेवन, पुराना कब्ज, पाचन शक्ति का कमजोर होना भी सफेद दाग होने के कारणों में आता है |
अत्यधिक मानसिक चिंता, क्रोनिक या पेट में ज्यादा गैस्ट्रिक विकार होने से |
आहार नलिका में इन्फेक्शन,टाइफाइड |
लीवर और थायराइड की गड़बड़ी से भी सफेद दाग की बीमारी हो सकती है। दरअसल थायरॉयड की वजह से भी स्किन से नेचुरल तेल निकलने की कमी से त्वचा ड्राई लगने लगती है। और आगे चलकर वो सफ़ेद दाग होने का कारण बन जाती है |
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) उलटा असर, मतलब जब शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम ठीक से काम ना करें |
एन्टीबायोटिक तथा तेज औषधियों की भारी खुराक से भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।

                    *सफेद दाग के लक्षण*

इस रोग के लक्षणों में शुरू में हाथों, कोहनी, चेहरे, टखने, पैर, कमर आदि स्थानों पर सफेद दाग उभर कर धीरे-धीरे सारे शरीर में फैलते हैं तथा इन दागों में कोई पीड़ा नहीं होती है।
या अन्य मांसाहार, शराब, तंबाकू से परहेज करें।
लौकी को उबालकर इसका पानी पियें |
आलू, उड़द, गन्ना, प्याज, मक्खन, दूध, जामुन, मिठाई, केला न खाएं।
दूध और मछली या दूध और मांस एक साथ सेवन न करें। इन चीजो का सफेद दाग में विशेष तौर पर परहेज रखें
दूध से बनी चीजों का सेवन कम कर दें, मिठाई, रबडी, दही का एक साथ खाने में शामिल न करें।
तिल, गुड़ और दूध भी एक साथ सेवन न करें।
खट्टी चीजें जैस इमली, खटाई, नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अमरुद, आलूबुखारा, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं। इन चीजो का सफेद दाग में परहेज रखें |

आइये खोजे रसोई में स्वास्थ्य

सादर नमस्कार आइये खोजे रसोई में स्वास्थ्य 

रसोई में स्वास्थ्य


1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें।थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर केवल तिल, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं ।

4=सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें।

5= रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें।

6= काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं।खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी।

7= देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं।अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता।

8=ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा।

9=ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी।

10=भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा।

11=नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें।

12=सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा।

13=चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी।

14=चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें।

15= छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते।

16= चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे.

17- डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें।

18- रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें।

19- करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा।

20- पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे।

21- प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं।

22- माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है।

23- खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं।

24- बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं।

25- तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी।

26- मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे।

27- अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे।

28- बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है।

29- पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी।

30- रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें।

31- रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा।

32- सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी।

33- रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम।

34- एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी।

35- चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी।

36- रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है।

37- सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा।

38- सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा.

39. रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा

40- कभी-कभी नमक-हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता।

41- बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा।

42- सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय के ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक का काम करेगा.                                 ----------------------------------

हृदय
 
                             *हृदय की बीमारी आयुर्वेदिक इलाज*

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !!
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी, जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!!
(Astang hrudayam)
इस पुस्तक मे उन्होने
बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! यह उनमे से ही एक सूत्र है !!
वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है !
अम्लता आप समझते है !
जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! अम्लता दो तरह की होती है !
एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता.
आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है.
खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है और अगर ये अम्लता (acidity) और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी !
और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती hai और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता और नलिया मे blockage कर देता है !
तभी heart attack होता है ! इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!
*इलाज क्या है ??*
वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !
आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !
अम्लीय और क्षारीय !!
acidic and alkaline
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ?
acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ?
neutral होता है सब जानते है !!
तो वागबट जी लिखते है
कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजे खाओ !
तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !
ये है सारी कहानी !!
अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये?
आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है !
तो दुबारा न आए !
सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी ! जिसे दुधी भी कहते है !
English मे इसे कहते है bottle gourd ! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !
इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो
या कच्ची लौकी खायो !
वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है ! तो आप लौकी के रस का सेवन करे !
*कितना सेवन करे*
रोज 200 से 300 ग्राम पियो !
कब पिये ?
सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद) पी सकते है.
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !
इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
तुलसी बहुत क्षारीय है !
इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है. पुदीना बहुत क्षारीय है.
इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !
ये भी बहुत क्षारीय है !
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !
वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !
ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है.
तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा. 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !
कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !
घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और पैसे बच जाये तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे ! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!
*अमर शहीद  राजीव दीक्षित जी की प्रेरणा से* ......

हल्दी का पानी

*हल्दी का पानी*
       
पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है यह 7 फायदें.....
1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है. सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है.

2. रोज यदि आप हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है. यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है.

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है. हल्दी के पानी में टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है. हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं.

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए. हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है. हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं.

6. शरीर में किसी भी तरह की सजून हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें. हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है. सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी.

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी. हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है. हल्दी एंटी-कैंसर युक्त होती है. यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें.

हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम 

१- खाना खाने के १.३० घंटे बाद पानी पीना है .

२- पानी घूँट घूँट करके पीना है जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके, पेट में acid बनता है और मुँह में छार, दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा.

३- पानी कभी भी ठंडा  (फ़्रीज़ का) नहीं पीना है। 

४- सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना है ,रात भर जो अपने मुँह में लार है वो अमूल्य है उसको पेट में ही जाना ही  चाहिए । 

५- खाना, जितने आपके मुँह में दाँत है उतनी बार ही चबाना  है ।

६ -खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा या उखड़ूँ बैठकर ही भोजन करे । 

७ -खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही, प्याज़ के साथ दूध, दही के साथ उड़द दlल .

८ -समुद्री नमक की जगह सेंधl नमक या काला नमक खाना चाहिए.

९- रीफ़ाइन तेल, डालडा ज़हर है इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों, तिल, मूँगफली, नारियल का तेल उपयोग में लाए । सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है , आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते है ।

१०- दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए.

११- घर में चीनी (शुगर ) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आजकल गुड बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है इसलिए सफ़ेद गुड ना खाए । प्राकृतिक गुड ही खाये । और प्राकृतिक गुड चोकलेट कलर का होता है। 

१२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए।    

१३- घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन, कुकर नहीं होना चाहिए। हमारे बर्तन मिट्टी, पीतल लोहा, काँसा के होने चाहिए .

१४ -दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवम शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए . 

१५- सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए ।   
 
यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी । यदि आप बीमार है तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे।

मेथी दानों


*सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ*

➡ मेथीदाना उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है | यह पुष्टिकारक, शक्ति,  स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है | सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है, कब्ज व गैस को दूर करता है | इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं | यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी हैं |

➡ अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे–धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों, जैसे– घुटनों व जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, हाथों का सुन्न पड़ जाना, सायटिका, मांसपेशियों का खिंचाव, बार-बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है | गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है 

*शक्तिवर्धक पेय*
दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४–५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय, इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें 

*औषधीय प्रयोग*
1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है. भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है |

2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें | इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें | २ चम्मच यह मिश्रण सुबह- शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों, कमर व घुटनों का दर्द, आमवात
(गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है | इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी |

3. पेट के रोगों में : १ से ३ ग्राम मेथीदानों का चूर्ण सुबह, दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच, दस्त, भूख न लगना, अफरा, दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है |

4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह–शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है |
5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें | आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है |

6. अंगों की जकड़न : भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें | १–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है |

7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक, मेथी के लड्डू, मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं |

*IMPORTANT* HEART ATTACK 

गर्म पानी पीना
यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack
के बारे में भी एक अच्छा लेख है। चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं, ठंडा पानी नहीं। अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए। जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं यह लेख उनके लिए ही है। 
भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं ठोस रूप में बदल देता है। इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है। जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है तो यह टूट जाता है और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है। यह आँतों में एकत्र हो जाता है। फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है।
इसलिए सबसे अच्छा यह है कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये। एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए। इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे। 

बांझपन

Sex Knowledge
* बांझपन का 100% आयुर्वेदिक इलाज *

बांझपन

    *पुरुषों और महिलाओं में बांझपन के लक्षण*

बांझपन जिसे कई लोग बंध्यापन तथा इनफर्टिलिटी के नाम से भी जानते हैं। हमारे समाज में बांझपन की समस्या को महिलाओं से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन यह अवधारणा बिल्कुल ही गलत हैं। एक बच्चे को जन्म देने में जितनी अहम भूमिका स्त्री की होती हैं उतनी ही सामान भागीदारी पुरुष की भी होती है। इसलिए बांझपन के लिए सिर्फ स्त्री को जिम्मेवार ठहराना बिल्कुल ही गलत हैं।

          *पुरुषों में बांझपन के आम लक्षण*

➿ *शुक्राणुओं की कमी या निल शुक्राणु*
पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी से अथवा शुक्राणुओं की अनुपस्थिति से बांझपन की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

➿ *उम्र का बढ़ना*
अधिक उम्र में पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम हो जाता है जिससे शुक्राणुओं की कमी होती है एवं बांझपन की समस्या आती है।

➿ *टेस्टिकल्स में दर्द या सूजन*
टेस्टिकल में नस में सूजन या दर्द के कारण पुरुषों में प्रजनन क्षमता कम हो जाती हैं। समय पर उपचार करने से यह ठीक हो सकता हैं।

➿ *इरेक्शन को बनाए रखने में समस्याएं*
पुरुषों में संभोग के समय इरेक्शन न होना या संभोग के अंत तक इरेक्शन न बनाये रख पाने की समस्याएं से गर्भधारण के दौरान समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

➿ *इजैकुलेशन में समस्याएं*
बहुत बार व्यक्ति पूरी तरह से इजैकुलेशन करने में सक्षम नहीं हो पता है, जो बांझपन का कारण बनता है और इसे इलाज की आवश्यकता होती है।

➿ *छोटे, फर्म टेस्टिकल्स*
टेस्टिकल कुछ पुरुषों में पेट के अंदर ही रह जाते है और उपयुक्त जगह नहीं होने के कारण शुक्राणुओं बन नहीं पाते हैं। टेस्टिकल या शुक्राणु नलिका में जन्मजात दोष होने पर भी प्रजनन क्षमता कम हो जाती हैं।

        *महिलाओं में बांझपन के आम लक्षण*

➿ *अनियमित माहवारी*
अनियमित पीरियड वह होता है, जिसमें माहवारी की अवधि, यानि की मासिक चक्र एक चक्र से दूसरे चक्र तक, लम्बी हो जाती है या वे बहुत जल्दी होने लगती हैं। महिलाओं को एक साल में 11 से 13 पीरियड्स आते हैं और इस संख्या से कम या ज्यादा होना अनियमित पीरियड्स के लक्षण हैं।

➿ *दर्दनाक या भारी माहवारी*
पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने की समस्या को मेनोर्रहाजिया कहा जाता है। प्रजनन अंगों में कई तरह के संक्रमण एंडोमेट्रियल पोलिप या गर्भाशय में ट्यूमर हैवी ब्लीडिंग का कारण हो सकते हैं।

➿ *कोई माहवारी नहीं*
जो महिलाएं मीनोपॉज की उम्र के करीब पहुंच जाती हैं, उन महिलाओं में पीरियड्स के छूटने, हलके या भारी पीरियड्स के लक्षण हो सकते हैं। 
इसके लिए डॉक्टर की सलाह और उचित जांच भी आवश्यक है।

➿ *हार्मोन असंतुलन के लक्षण*
पिट्यूटरी ग्लैंड प्रोलैक्टिन हार्मोन को कम मात्रा में उत्पादन करते हैं जिससे एस्ट्रोजेन हार्मोन की कमी होती है और इससे बांझपन होता है। 

➿ *Polycystic Ovarian Disease*
इस बीमारी की वजह से भी महिलाओं में बांझपन होता है। इसमें महिलाओं के ओवरीज पर सिस्ट हो जाते हैं। जिससे उन्हें गर्भधारण करने में दिक्कत आती है।

                
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