बुधवार, 11 जुलाई 2018

लकवा का 100% आयुर्वेदिक इलाज


                    *लकवा का 100% आयुर्वेदिक इलाज* 


                                  *लकवा【Paralysis】*

लकवा (पैरालिसिस) यह रोग शरीर के स्नायुओं और स्नायु केंद्र, दिमाग का रोग है। जिस इंसान के शरीर का स्नायुमंडल, स्नायु केंद्र और मस्तिष्क अच्छी तथा स्वाभाविक दशा में रहते हैं, उसे लकवा कभी नहीं होता। आरंभ से ही यदि प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाया जाए, संयम, नियम से काम किया जाए, स्वास्थ्यवर्धक एवं उपयुक्त आहार-विहार का आश्रय लिया जाए तथा हर प्रकार के मानसिक तनावों एवं चिंताओं से बचा जाए तो लकवा होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। लकवा आने से बहुत पहले ही मस्तिष्क कमजोर पड़ जाता है। शरीर के स्नायु जगह-जगह कमजोर एवं शक्तिहीन हो जाते हैं। इससे आंख तथा कान आदि इंद्रियों की कार्यक्षमता मंद पड़ जाती है। थोड़ा सा काम या बातें करने पर ही थकान महसूस होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगे तो ये पैरालिसिस होने के लक्षण हो सकते है। जब ऐसा हो तो तुरंत सजग हो जाएँ और जरूरी उपचार लेना आरंभ कर दें। और सभी कार्य बंद करके शारीरिक एवं मानसिक आराम करें। प्राकृतिक आहार विहार अपनाएँ। कम परिश्रम करें |

यह बीमारी ज्यादातर 30 से ज्यादा की उम्र वालों को होता है | यह एक ऐसा रोग हैं जो की व्यक्ति को असहाय कर देता हैं, जिसको लकवा हुआ होता हैं उसकी और देखा भी नहीं जा सकता, रोगी की ऐसी हालत हो जाती हैं. ऐसे में लकवा का रोगी लाचार असहाय-सा दूसरे व्यक्तियों के मुंह की तरह देखता रहता हैं |

मांसपेशियों में एक विशेष प्रकार का ऊतक है जो हमारे शरीर को स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है. यह तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में है, जो शरीर के सभी हिस्सों से संदेश भेजता है. कभी-कभी तंत्रिका कोशिकाओं, या न्यूरॉन्स, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं, रोगग्रस्त या घायल हो जाते हैं जब ऐसा होता है, तो एक व्यक्ति स्वेच्छा से यानी अपनी मर्जी से मांसपेशियों को स्थानांतरित करने की क्षमता खो देता है इसी को हम लकवा कहते हैं. यानी रोगी अपने शरीर के किसी अंग पर नियंत्रण करने की क्षमता खो देता हैं इसी प्रक्रिया को हम लकवा कहते हैं.
लकवे का असर व्यक्ति के शरीर के किसी भी अंग पर हो सकता हैं, ज्यादातर ऐसे अंगों पर यह दौरा पढता जिस अंग की मांसपेशियां कमजोर हो.
                                        *लकवा के प्रकार*
पैरालिसिस के कई प्रकार होते हैं, यह शरीर के किसी भी अंग पर लग सकता है |
*1.आधे शरीर का लकवा –* इसमें शरीर का आधा भाग लकवाग्रस्त हो जाता हैं इसे इंग्लिश में one sided paralysis कहा जाता हैं. 

*2.एकांग लकवा –* जब किसी व्यक्ति के शरीर के किसी एक अंग में लकवा लगता है तो उसे एकांग का लकवा कहते है |

*3.पूर्णांग का लकवा –* किसी व्यक्ति के शरीर के दोनों हाथ और दोनों पैर लकवा ग्रस्त हो जाते हैं तो उसे पूर्णांग लकवा कहा जाता है |

*4.निम्न अंग का लकवा –* शरीर के निचले हिस्से के किसी अंग पर लकवा लगने को ही निम्न अंग का लकवा कहते है |

*5.चहरे का लकवा –* यह लकवा चेहरे पर लगता हैं, यानी चेहरे के किसी एक हिस्से पर इसका प्रभाव होता हैं. जिस हिस्से पर इसका प्रभाव हो वह लटक जाता हैं |

लकवा के और भी कई प्रकार हैं लेकिन जो हमने आपको यहां पर बताये हैं यह सबसे सामान्य हैं यानी ज्यादातर लोगों को इन्ही अंगों में लकवा लगता हैं.

                                     *लकवा होने के कारण*
लकवा लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो की इस तरह है :-
धमनियों में किसी खराबी के कारण भी पैरालिसिस हो सकता है |

मस्तिष्क की नसों के फटने से भी यह रोग होने की संभावना रहती है |

सिर (मस्तिष्क) में खून बहने से भी लकवे की शिकायत हो जाती है |

जिन लोगों को ब्रेन ट्यूमर और कैंसर रोग है उनको भी यह लकवा लगने का डर रहता है |

चोट के कारण भी ज्यादातर लकवा लगते हैं. ज्यादातर रोगी ऐसे ही देखने को मिलते है जिन्हें चोट के कारण पैरालिसिस हो सकता है |

व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने से भी यह रोग हो सकता है |

अचानक किसी भी चीज के बारे में अच्छी या बुरी खबर सुनने से भी ज्यादा ख़ुशी या ज्यादा गम के सदमे के कारण भी पैरालिसिस हो सकता है|
हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होने से भी ज्यादातर व्यक्तियों को लकवा लगता है |
स्नायु संस्थान की कमजोरी होने पर ही यह बीमारी जन्म लेती है |
बताये गए यह सभी कारण लकवा को जन्म देते हैं, ऐसे में जरुरी हैं की आम स्वस्थ्य व्यक्ति भी इन सभी कारणों पर ध्यान दें |

                                      *लकवा के लक्षण*
इस बीमारी में रोगी का आधा मुंह टेढ़ा हो जाता है। गर्दन टेढ़ी हो जाती है, मुंह से आवाज नहीं निकल पाती है। आंख, नाक, भौंह व गाल टेढ़े पड़ जाते हैं, फड़कते हैं और इनमें वेदना होती है। मुंह से लार गिरा करती है।
जब किसी व्यक्ति के शरीर में किसी अंग पर लकवा लगने वाला होता है तो वह पहले ही लक्षण दिखाने लगता हैं. यानी की ऐसा नहीं हैं की सीधे ही किसी एक दिन लकवा लग जाता हैं, बल्कि इस बीच शरीर के जिस अंग पर लकवा लगना है वह पहले ही संकेत देने लगता हैं तो आइये जाने उस संकेतों के बारे में |

 *स्नायु की शिथिलता –* जब भी शरीर में लकवा लगने वाला होता है तो शरीर के स्नायु धीमे हो जाते हैं, वह ठीक तरह से काम करना बंद कर देते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी को जीभ में लकवा लगने वाला है तो उसे इस तरह से लक्षण दिखाई देने लगेंगे – कई बार जीभ उसके इशारे से इधर उधर नहीं मुड़ेगी, कई बार एहसास होगा की जीभ हिल नहीं रही है, जीभ का शुन्य पढ़ जाना आदि इस तरह से शरीर के सभी अंग लक्षण देने लगते हैं |

जिस भी व्यक्ति को लकवा लगने वाला होता है उसमे उत्साह की कमी देखी जा सकती है जैसे-
सीढ़ियां उतरने व चढ़ने में दिक्कत आना
हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ना
पूरी नींद नहीं आना
भूख कम लगना
लकवा लगने वाले अंग की स्पर्श शक्ति का कमजोर होना
लिखने व पढ़ने, बोलने में समस्या आने लगती हे

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